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Gaganyan Air Drop Test

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के तहत क्रू मॉड्यूल का पहला एकीकृत एयर-ड्रॉप परीक्षण (IADT-01) सफलतापूर्वक पूरा किया।

परीक्षण प्रक्रिया:

  • भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से 4 किलोमीटर की ऊँचाई पर क्रू मॉड्यूल को छोड़ा गया।
  • लगभग 5 टन वजनी मॉड्यूल आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा तट के पास बंगाल की खाड़ी में सुरक्षित उतरा।
  • उद्देश्य: अंतरिक्ष से लौटते समय अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित जल सतह पर स्प्लैशडाउन लैंडिंग की तैयारी और परीक्षण।
  • इस मॉड्यूल को इसरो और डीआरडीओ ने संयुक्त रूप से तैयार किया।

क्रू मॉड्यूल का पैराशूट सिस्टम

  • गगनयान क्रू मॉड्यूल के पैराशूट सिस्टम में 10 पैराशूट होंगे।
  • इसमें 2 एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट, 2 ड्रोग, 3 पायलट पैराशूट व 3 मुख्य पैराशूट होंगे।

गगनयान मिशन: भारत का पहला मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम

  • इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन के अनुसार भारत का पहला मानवरहित गगनयान मिशन (G1) दिसंबर 2025 में प्रक्षेपित होगा।  
  • इसमें मानव-सदृश रोबोट व्योममित्रा शामिल होगी।
  • इस मिशन के कुल परीक्षणों का लगभग 80% (7,700 परीक्षण) पूरा हो चुका है और शेष परीक्षण मार्च 2026 तक पूरे किए जाएंगे।
  • गगनयान का लक्ष्य तीन सदस्यीय चालक दल को लगभग 400 किलोमीटर की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में तीन दिन के लिए भेजना और सुरक्षित रूप से वापस लाना है।
  • इस परियोजना में दो मानवरहित और एक मानवयुक्त उड़ान शामिल है, जिसमें पहली मानवयुक्त उड़ान 2026 से पहले होने की संभावना है।
  • यह मिशन भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता हासिल करने वाला चौथा देश बनाएगा।
  • इस मिशन से अंतरिक्ष अनुसंधान, सूक्ष्मगुरुत्व प्रयोग, उद्योग, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार और आर्थिक विकास में योगदान होगा।

तकनीक और प्रणालियाँ

  • गगनयान के लिए LVM3 रॉकेट को मानव-योग्य प्रक्षेपण यान में बदला गया है, जिसमें ठोस, द्रव और क्रायोजेनिक तीन चरणीय प्रणोदन प्रणाली है।
  • मिशन के लिए क्रू मॉड्यूल और सेवा मॉड्यूल विकसित किए गए हैं, जिनमें जीवन समर्थन, नियंत्रण प्रणाली, ऊर्जा और तापीय नियंत्रण शामिल हैं।
  • क्रू एस्केप सिस्टम (CES) आपात स्थिति में चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तैयार किया गया है।
  • पृथ्वी जैसा वातावरण देने के लिए ऑक्सीजन, जल, अपशिष्ट प्रबंधन और आपातकालीन निकास वाली जीवन समर्थन प्रणाली विकसित की गई है।

अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण

  • चयनित अंतरिक्ष यात्रियों को बेंगलुरु में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें कक्षा पाठ्यक्रम, शारीरिक फिटनेस, सिम्युलेटर अभ्यास, पैराबोलिक उड़ान, एयरो-मेडिकल और आपातकालीन रिकवरी प्रशिक्षण शामिल हैं।

मिशन के चरण

  • पहला चरण: परीक्षण चरण – एबॉर्ट टेस्ट, वायु ड्रॉप टेस्ट और परीक्षण वाहन उड़ानें।
  • दूसरा चरण: मानवरहित मिशन – व्योममित्रा के साथ तकनीक और सुरक्षा का सत्यापन।
  • तीसरा चरण: मानवयुक्त मिशन – तीन अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में भेजा जाएगा।